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ESSAY TEST 01 (Mangal Inscript & Remington gail Font) ()
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मानव जीवन में खेल-कूद का महत्व है। भूतकाल में हमारे देश में खेल-कूद को महत्व नहीं दिया जाता था। लेकिन, अब हम महसूस करने लगे हैं कि खेल-कूद बहुत उपयोगी है। इसलिए हमारे देश की प्रत्येक शैक्षणिक संस्था खेल-कूद की व्यवस्था करती है। वस्तुत: खेल-कूद शिक्षा का एक आवश्यक अंग है। खेल-कूद का बहुत महत्व है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमें खेल-कूद में भाग लेना चाहिए। हमारे जीवन में स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण चीज है। शरीर और मस्तिष्क के विकास के लिए खेल-कूद आवश्यक है। यदि हमारा स्वास्थ्य खराब है तो हम कोई काम नहीं कर सकते। स्वास्थ्य और शारीरिक बल के विकास के लिए खेल-कूद आवश्यक है। खेल-कूद से बहुत लाभ है। वे स्वास्थ्य और शारीरिक बल का विकास करते हैं। शरीर और मस्तिष्क के विकास के लिए वे आवश्यक हैं। जब हम खेल-कूद में भाग लेते हैं तब हमारे शरीर का अच्छा व्यायाम होता है। खेल-कूद खुली हवा में होता है। जब हम खेल-कूद में भाग लेते हैं तब हम स्वच्छ हवा में सांस लेते हैं। इसलिए खेल-कूद हमारे स्वास्थ्य और शारीरिक बल का विकास करते हैं। खेल-कूद से हम अनेक गुण सीखते हैं। जब हम खेल-कूद में भाग लेते हैं तब हमें कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। इसलिए खेल-कूद से हम अनुशासन सीखते हैं। जो व्यावहारिक जीवन में बहुत उपयोगी है। खेल-कूद से हम आत्म-नियंत्रण सीखते हैं। अच्छा खिलाड़ी विजय होने पर अत्यधिक आनंद नहीं मानता। जब वह पराजित हो जाता है तब वह निराश नहीं होता। जब हम खेल-कूद में भाग लेता है तब वह परिणाम की चिंता नहीं करता। खेल-कूद मनुष्य को व्यावहारिक जीवन के लिए प्रशिक्षत करता है। खेल के मैदान में जिन गुणों का विकास होता है वे बाद में जीवन में बहुत उपयोगी होते हैं। हमारा जीवन एक मनोरंजक खेल है। खेल-कूद में कुछ ऐसे गुणों का विकास होता है जो व्यावहारिक जीवन में उपयोगी सिद्ध होते हैं। यद्यपि खेल-कूद बहुत उपयोगी हैं फिर भी उनमें बुराइयां भी हैं। यदि हम उनमें बहुत भाग लेते हैं तो हमारा स्वास्थ्य खराब हो जाता है। खेल-कूद में विद्यार्थियों का बहुत समय चला जाता है। खिलाड़ी प्राय: अपने अध्ययन की उपेक्षा करता है। कभी-कभी खेल-कूद को लोग जीवन का मुख्य काम बना लेते हैं। जब विद्यार्थी खेल-कूद को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बना लेते हैं तब वे अपने जीवन को बर्बाद कर लेते हैं। उनको खेल-कूद और अध्ययन में संतुलन बनाकर रखना चाहिए। वर्तमान में यही विद्यार्थी जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिए।
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